उत्तर-दक्षिण या किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आश्वासन दिया कि परिसीमन की प्रक्रिया में उत्तर और दक्षिण या किसी भी राज्य के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। राज्यों के बीच सीटों का वर्तमान अनुपात यथावत रखा जाएगा।
महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष के 'कितु-परंतु' पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे तकनीकी पेच और बहानेबाजी बताया, जिसके कारण पिछले तीन दशकों से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू नहीं हो सका।
उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग आज महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, उन्हें भविष्य में इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि देश की नारी शक्ति उनकी नीयत को देखेगी।
संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की चुनौती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संख्या का निर्णय समय करेगा, लेकिन महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट है।
उल्लेखनीय है कि 17 अप्रैल को लोकसभा में इस विधेयक पर मतदान होना है। 16 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण के साथ परिसीमन और सीट बढ़ाने की आवश्यकता को स्पष्ट किया।
भाषण के मुख्य बिंदु
- राज्यों के बीच सीटों के वर्तमान अनुपात में कोई बदलाव नहीं होगा।
- उत्तर-दक्षिण या किसी भी राज्य के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।
- विपक्ष की आपत्तियों को तकनीकी बहाने बताया गया।
- महिला आरक्षण पिछले 30 वर्षों से लंबित है।
- सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव, जिससे महिलाओं को अधिक अवसर मिलेंगे।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पहले यह धारणा थी कि पंचायतों में आरक्षण आसानी से दिया जा सकता है, क्योंकि वहां नेताओं को अपने पद खोने का डर नहीं होता था, जबकि संसद में ऐसा करने से वे हिचकते थे।
बिना किसी सरकार का नाम लिए उन्होंने इशारा किया कि पहले महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा से पारित होने के बावजूद लोकसभा में पारित नहीं हो सका था, क्योंकि राजनीतिक सहमति का अभाव था।
उन्होंने बताया कि वर्तमान प्रस्ताव में इस चिंता का समाधान किया गया है, जिसमें राज्यों में कुल सीटों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया गया है, ताकि मौजूदा हिस्सेदारी प्रभावित न हो और महिलाओं को अधिक अवसर मिल सकें।
महिलाओं के अधिकारों से वंचित रखना एक ऐतिहासिक गलती बताते हुए प्रधानमंत्री ने इसे सुधारने का अवसर कहा और सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में देखें।