भारत का पहला मेगा ग्रीनफील्ड शिपयार्ड
14 मई (केएनएन) को तमिलनाडु के थूथुकुडी में भारत के पहले मेगा ग्रीनफील्ड शिपयार्ड के विकास के लिए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना देश की जहाज निर्माण क्षमता और समुद्री बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
समझौते का विवरण
यह परामर्श सेवाओं से संबंधित समझौता एचडी कोरिया शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंजीनियरिंग, नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क तमिलनाडु लिमिटेड और सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत किया गया।
इस अवसर पर केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सरबानंद सोनोवाल की उपस्थिति में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के दौरान समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान हुआ।
परियोजना क्षमता और रोजगार सृजन
प्रस्तावित शिपयार्ड की वार्षिक क्षमता 25 लाख सकल टन (GT) होगी। इसके पूर्ण रूप से कार्यशील होने पर लगभग 15,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, साथ ही तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
भारत–दक्षिण कोरिया समुद्री सहयोग
यह समझौता भारत और दक्षिण कोरिया के बीच समुद्री सहयोग ढांचे “VOYAGES” (Shared Vision for Operation of Yard Assisted Growth with Efficiency and Scale) का हिस्सा है।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्युंग के बीच हुई चर्चाओं के बाद शुरू की गई, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करना है।