जनजातीय कल्याण का बजट बढ़ाकर 1.50 लाख करोड़ रुपये किया गया


जनजातीय कल्याण का बजट बढ़ाकर 1.50 लाख करोड़ रुपये किया गया

24 मई को केंद्र सरकार ने जनजातीय कल्याण के समग्र बजट को लगभग पांच गुना बढ़ाकर 28,000 करोड़ रुपये से 1.50 लाख करोड़ रुपये कर दिया। यह बढ़ोतरी अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए विभिन्न मंत्रालयों द्वारा किए जाने वाले समेकित व्यय के अंतर्गत की गई है।

जनजातीय सशक्तिकरण और विकास को गति देने के उद्देश्य से किए गए इस ऐतिहासिक बजट आवंटन तथा प्रमुख योजनाओं का विवरण निम्नलिखित है:

बहु-मंत्रालयी पहल

जनजातीय विकास कार्ययोजना के अंतर्गत 40 से अधिक केंद्रीय मंत्रालय अपने बजट का एक हिस्सा जनजातीय विकास कार्यक्रमों के लिए आवंटित करते हैं। इस समेकित आवंटन को बढ़ाकर अब 1.50 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय का बजट

जनजातीय कार्य मंत्रालय के मूल बजट में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। मंत्रालय का बजट बढ़ाकर 14,926 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं

शिक्षा, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और आजीविका के विकास के लिए पीएम-जनमन (PM-JANMAN) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी प्रमुख योजनाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

शिक्षा का विस्तार

देशभर में 700 से अधिक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के संचालन और विस्तार के लिए लगभग 7,150 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इन विद्यालयों का उद्देश्य जनजातीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समग्र विकास के अवसर प्रदान करना है।




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