नैनोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कॅरियर की क्या संभावनाएँ हैं तथा इससे संबंधित पाठ्यक्रम कराने वाले प्रमुख संस्थान कौन-कौनसे हैं ?

नैनोटेक्नोलॉजी का अर्थ है- साइंस ऑफ मिनिएचर अर्थात लघुत्तर का विज्ञान । जब कोई वस्तु या सामग्री नैनोडाइमेंशन (10-9 मीटर = 1 नैनोमीटर) में बदल जाती है तो उसके भौतिक, रासायनिक,चुम्बकीय, प्रकाशीय, यांत्रिक और इलेक्ट्रिक गुणों में भी भारी परिवर्तन हो जाता है। यह तकनीक साइंस, मेडिकल साइंस, पर्यावरण विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स,कॉस्मेटिक्स, सिक्योरिटी, फैब्रिक्स और विविध क्षेत्रों में बहुत उपयोगी है । वैज्ञानिकों के अनुसार 21वीं सदी नैनोटेक्नोलॉजी की होगी। यह अनुमान व्यक्त किया जा रहा है कि नैनोटेक्नोलॉजी प्रत्येक क्षेत्र जैसे मेडिसिन, एयरोस्पेस, इंजीनियरिंग, विभिन्न उद्योगों और तकनीकी क्षेत्रों, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी। कुल मिलाकर ऐसा कोई क्षेत्र नहीं होगा, जो भविष्य में नैनोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं करेगा। विज्ञान, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के किसी भी विषय से स्नातक, पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर नैनोटेक्नोलॉजी विषय ले सकते हैं। नैनोटेक्नोलॉजी से जुड़े विभिन्न कोर्स इन संस्थानों से किए जा सकते हैं-पुणे विश्वविद्यालय, पुणे, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, दिल्ली विश्वविद्यालय,दिल्ली, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रूडक़ी, मुंबई, गुवाहाटी, तथा कानपुर, जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च, बंगलुरु।

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