संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा श्रेणी-3

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मध्यप्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा
(पूर्व नाम संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा श्रेणी-3)

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मध्यप्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा
(पूर्व नाम संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा श्रेणी-3)

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (child Development & Pedagogy) इसके तहत 30 प्रश्न

(अ) बाल विकास के 15 प्रश्न, इन अध्यायों से संबंधित-
• बाल विकास की अवधारणा एवं इसका अधिगम से संबंध।
• विकास और विकास को प्रभावित करने वाले कारक ।
• बाल विकास के सिद्धांत।
• बालकों का मानिसक स्वास्थ्य एवं व्यवहार संबंधी समस्याएं।
• वंशानुक्रम एवं वातावरण का प्रभाव।
• समाजीकरण प्रक्रियाएं : सामाजिक जगत एवं बच्चे (शिक्षक, अभिभावक, साथी)।
• पियाजे, पावलव, कोहलर और थार्नडाइकः रचना एवं आलोचनात्मक स्वरूप।
• बाल केंद्रित एवं प्रगतिशील शिक्षा की अवधारणा ।
• बुद्धि की रचना का आलोचनात्मक स्वरूप और उसका मापन, बहुआयामी बुद्धि।
• व्यक्तित्व और उसका मापन।
• भाषा और विचार।
• सामाजिक निर्माण के रूप में जेंडर, जेंडर की भूमिका, लिंगभेद और शैक्षिक प्रथाएं।
• अधिगम कर्त्ताओं में व्यक्तिगत भिन्नताएं, भाषा, जाति, लिंग, सम्प्रदाय, धर्म आदि की विषमताओं पर आधारित भिन्नताओं की समझ।
• अधिगम के लिए आंकलन और अधिगम का आंकलन में अंतर, शाला आधारित आंकलन, सतत एवं समग्र मूल्यांकनः स्वरूप और प्रथाएं (मान्यताएं)
• अधिगमकर्ताओं की तैयारी के स्तर का आंकलन हेतु उपयुक्त प्रश्नों का निर्माण, कक्षाकक्ष में अधिगम को बढ़ाने आलोचनात्मक चिंतन तथा अधिगमकर्ता की उपलब्धि के आंकलन के लिए।

(ब) समावेशित शिक्षा की अवधारणा एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समझ पर 5 प्रश्न, इन अध्यायों से संबंधित-
• अलाभाविंत एवं वंचित वर्गों सहित विविध पृष्ठभूमियों के अधिगमकर्ताओं की पहचान ।
• अधिगम कठिनाइयों, ‘क्षति’ आदि से ग्रस्त बच्चों की आवश्यकताओं की पहचान।
• प्रतिभावान, सृजनात्मक, विशेष क्षमता वाले अधिगमकर्ताओं की पहचान।
• समस्याग्रस्त बालकः पहचान एवं निदानात्मक पक्ष।
• बाल अपराधः कारण एवं प्रकार

(स) अधिगम और शिक्षाशास्त्र (पेडागाजी) के तहत 10 प्रश्न, इन अध्यायों से संबंधित-
• बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं, बच्चे शाला प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में क्यों और कैसे असफल होते है।
• शिक्षण और अधिगम की मूलभूत प्रक्रियाएं, बच्चों के अधिगम की रणनीतियां, अधिगम एक सामाजिक प्रक्रिया के रूप में, अधिगम का सामाजिक संदर्भ।
• समस्या समाधान कर्ता और वैज्ञानिक-अन्वेषक के रूप में बच्चा ।
• बच्चों में अधिगम की वैकल्पिक धारणाएं, बच्चों की त्रुटियों को अधिगम प्रक्रिया में सार्थक कड़ी के रूप में समझना । अधिगम को प्रभावित करने वाले कारकः अवधान और रुचि।
• संज्ञान और संवेग
• अभिप्रेरणा और अधिगम
• अधिगम में योगदान देने वाले कारक-व्यक्तिगत और पर्यावरणीय
• निर्देशन एवं परामर्श
• अभिक्षमता और उसका मापन
• स्मृ्ति और विस्मृपति

हिन्दी भाषा इसके तहत 30 प्रश्न, इन दो भागों से संबंधित- भाषायी समझ/ अवबोध तथा भाषायी विकास

(अ) भाषायी समझ/ अवबोध के 15 प्रश्न, इन अध्यायों से संबंधित-
भाषायी समझ / अवबोध के लिए अपठित, जिसमें एक गद्यांश (नाटक/ एकांकी/ घटना/ निबंध/ कहानी आदि से) तथा दूसरा अपठित पद्य के रूप में इस अपठित में से समझ/ अवबोध, व्याजख्यास व्याधकरण एवं मौखिक योग्य ता से संबंधित प्रश्नब। गद्यांश साहित्यिक / वैज्ञानिक / सामाजिक समरसता / तात्‍कालिक घटनाओं पर आधारित प्रश्न।

(अ)2. भाषायी विकास हेतु निर्धारित शिक्षा शास्त्रग से संबंधित 15 प्रश्न, इन अध्यायों से संबंधित –
• भाषा सीखना एवं ग्रहणशीलता
• भाषा शिक्षण के सिद्धान्ता
• भाषा शिक्षण में सुनने, बोलने की भूमिका, भाषा के कार्य, बच्चेै भाषा का प्रयोग कैसे करते हैं।
• मौखिक और लिखित अभिव्यनक्ति अन्तकर्गत भाषा सीखने में व्यााकरण की भूमिका
• भाषा शिक्षण में विभिन्नत स्ततरों के बच्चोंन की चुनौतियां, कठिनाइयां, त्रुटियां एवं क्रमबद्धता
• भाषा के चारों कौशल (सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना) का मूल्यांाकन
• कक्षा में शिक्षण अधिगम सामग्री, पाठ्यपुस्तनक, दूरसंचार (दृश्यं एवं श्रव्यं) सामग्री, बहुकक्षा स्रोत
• पुन: शिक्षण

अंग्रेजी भाषा (English Language) 30 के प्रश्न । इसके दो भाग हैं- Compréhension , Pedagogy of language development

a. Compréhension 15 प्रश्न, इन अध्यायों से संबंधित-
Two unseen prose passages (discursive or literary or narrative or scientific) with questions on comprehension, grammar and verbal ability.

b. Pedagogy of language development के 15 questions, इन अध्यायों से संबंधित ।
• Learning and acquisition of language
• Principles of second language teaching
• Language skills-listening, speaking, reading, writing
• Role of listening and speaking, function of language and how children use it as a tool
• The role of grammar in learning a language for communicating ideas verbally and in written form
• Challenges of teaching language in a diverse classroom, language difficulties
• Teaching learning materials, text book, multi-media materials multi-lingual resource of the classroom
• Evaluating language comprehension and proficiency : listening, speaking, reading and writing
• Remedial teaching (Re- teaching )

संस्कृत भाषा के 30 प्रश्न, इन दो भागों से संबंधित – भाषायी समझ/अवबोध तथा भाषायी विकास

अ. भाषायी समझ/अवबोध के 15 प्रश्न, इन अध्यायों से संबंधित-
भाषायी / अवबोध के लिए दो अपठित जिसमें एक गद्यांश (नाटक/ एकांकी/ घटना/ निबंध/ कहानी आदि से) तथा दूसरा अपठित पद्य के रूप में इस अपठित में से समझ/ अवबोध, व्याशख्यास व्या्करण एवं मौखिक योग्यठता से संबंधित प्रश्नव। गद्यांश साहित्यिक / वैज्ञानिक / सामाजिक समरसता / तात्का लिक घटनाओं पर आधारित प्रश्न
ब. भाषायी विकास हेतु निर्धारित शिक्षा शास्त्रस से संबंधित 15 प्रश्नम, इन अध्यायों से संबंधित-
• भाषा सीखना एवं ग्रहणशीलता
• भाषा शिक्षण के सिद्धान्ता
• भाषा शिक्षण में सुनने, बोलने की भूमिका, भाषा के कार्य, बच्चे5 भाषा का प्रयोग कैसे करते हैं।
• मौखिक और लिखित अभिव्यनक्ति अन्तकर्गत भाषा सीखने में व्यााकरण की भूमिका।
• भाषा शिक्षण में विभिन्नत स्ततरों के बच्चोंन की चुनौतियां, कठिनाइयां, त्रुटियां एवं क्रमबद्धता।
• भाषा के चारों कौशल (सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना) का मूल्यांाकन।
• कक्षा में शिक्षण अधिगम सामग्री, पाठ्यपुस्त्क, दूरसंचार (दृश्यल एवं श्रव्यट) सामग्री, बहुकक्षा स्रोत।
• पुन: शिक्षण।

गणित के 30 प्रश्न, विषय वस्तु और पेडेगोजिकल से संबंधित –

अ. विषय वस्तुन (content) 15 प्रश्नप, इन अध्यायों से संबंधित –
• संख्याि पद्धति– 1000 से बड़ी संख्यारओं को पढ़ना व लिखना, 1000 से बड़ी संख्याकओं पर स्था–नीय मान की समझ व चार मूलभूत संक्रियाएं।
• जोड़ना व घटाना – पाँच अंकों तक की संख्याचओं का जोड़ना व घटाना।
• गुणा – 2 या 3 अंकों की संख्यामओं का गुणा करना।
• भाग – भिन्न् की अवधारणा, सरलतमरूप, समभिन्नक, विषम भिन्नय आदि भिन्नों का जोड़ना घटाना गुणा व भाग, समतुल्यप भिन्नि, भिन्नि को दशमलव में तथा दशमलव संख्याघ को भिन्ना में लिखना।
• सामान्यथत: प्रयोग होने वाली लंबाई, भार, आयतन की बड़ी व छोटी इकाई में संबंध।
• बड़ी इकाइयों में तथा छोटी इकाइयों में तथा छोटी इकाइयों को बड़ी इकाइयों में बदलना।
• ज्ञात इकाइयों में किसी ठोस वस्तुं का आयतन ज्ञात करना।
• पैसा, लंबाई, भार, आयतन तथा समय अंतराल से संबंधित प्रश्नोंन में चार मूल गणितीय संक्रियाओं का उपयोग करना।
• मीटर को सेंटीमीटर एवं सेंटीमीटर को मीटर में बदलना।
• पैटर्न – संख्याीओंसे संबंधित पैटर्न को समझ आगे बढ़ाना, पैटर्न तैयार कर उसका संक्रियाओं के आधार पर सामान्यीकरण, त्रिभुजीय संख्याेओं तथा वर्ग संख्यायओं के पैटर्न पहचानना।
• ज्या्मिति – मूल ज्या मितीय अवधारणाएं, किरण, रेखाखण्डै, कोण (कोणों का वर्गीकरण), त्रिभुज, (त्रिभुजों का वर्गीकरण) – (1) भुजाओं के आधार पर (2) कोणों के आधार पर त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 1800 होता है।
• वृत्त के केन्द्र , त्रिज्याक तथा व्याास की पहचान व समझ।
• वृत्त , त्रिज्याि व व्या्स में परस्पयर संबंध, सममित आकृत्ति, परिवेश आधार पर समानान्तयर रेखा व लम्बयवत रेखा की समझ।
• सरल ज्या‍मितीय आकृतियों (त्रिभुज, आयत, वर्ग) का क्षेत्रफल तथा परिमाप दी गई आकृति को इकाई मानकर ज्ञात करना।
• परिवेश की 2D आकृतियों की पहचान।
• दैनिक जीवन से संबंधित विभिन्नक आंकड़ों को एकत्र करना।
• घड़ी के समय को घंटे तथा मिनिट में पढ़ना तथा AM और PM में रूप में व्यीक्तं करना।
• 24 घंटे की घड़ी का 12 घंटे की घड़ी से संबंध।
• दैनिक जीवन की घटनाओं में लगने वाले समय अंतराल की गणना।
• गुणा तथा भाग में पैटर्न की पहचान।
• सममिति पर आधारित ज्या्मिति पैटर्न ।
• दण्डत आलेख के माध्यपम से प्रदर्शित कर उससे निष्कMर्ष निकालना।

ब. पेडेगोजिकल (Pedagogical Issues) 15 प्रश्नम, इन अध्यायों से संबंधित-
• गणित शिक्षण द्वारा चिन्तधन एवं तर्कशक्ति का विकास करना।
• पाठ्यक्रम में गणित का स्थायन
• गणित की भाषा
• प्रभावी शिक्षण हेतु परिवेश आधारित उपयुक्त् शैक्षणिक सहायक सामग्री का निर्माण एवं उसका उपयोग करने की क्षमता का विकास करना।
• मूल्यांएकन की नवीन विधियां, निदानात्माक परीक्षण व पुन: शिक्षण की क्षमता का विकास करना।
• गणित शिक्षण की नवीन विधियों का कक्षा शिक्षण में उपयोग करने की क्षमता

पर्यावरण अध्यवयन ( Environmental Study ) – 30 प्रश्न, इन भागों से संबंधित- अ. विषय वस्तु ब. पेडेगोजिकल मुद्दे

1. विषय वस्तुन ( 20 प्रश्नड )
1. हमारा परिवार, हमारे मित्र-
• परिवार और समाज से सहसंबंध – परिवार के बड़े बूढ़े, बीमार, किशोर, विशिष्टव आवश्यहकता वाले बच्चों की देखभाल और उनके प्रति हमारी संवेदनशीलता।
• हमारे पशु, पक्षी – हमारे पालतू पशु-पक्षी, माल वाहक पशु, हमारे आसपास के परिवेश में जीव-जन्तु , जानवरों पर प्रदूषण का प्रभाव।
• हमारे पेड़-पौधे –स्था नीय पेड़-पौधे पेड़-पौधों एवं मनुष्योंत की अन्तह:निर्भरता, वनों की सुरक्षा और उनकी आवश्यषकता और महत्वष, पेड़-पौधों पर प्रदूषण का प्रभाव।
• हमारे प्राकृतिक संसाधन – प्रमुख प्राकृतिक संसाधन, उनका संरक्षण, ऊर्जा के पारंपरिक और नवीनीकृत एवं अनवीनीकृत स्रोत।

2. खेल एवं कार्य-
• खेल, व्याययाम और योगासन।
• पारिवारिक उत्संव, विभिन्न। मनोरंजन के साधन – किताबें, कहानियां, कठपुतली प्लेक, मेला सांस्कृ्तिक कार्यक्रम एवं दिवसों को विद्यालय में मनाया जाना।
• विभिन्ने काम धंधें, उद्योंग और व्यावसाय।

3. आवास-
• पशु, पक्षी और मनुष्या के विभिन्नक आवास, आवास की आवश्यंकता और स्वयस्थ‍ जीवन के लिए आवास की विशेषताएं।
• स्था‍नीय इमारतों की सुरक्षा, सार्वजनिक संपत्ति, राष्ट्री य धरोहर और उनकी देखभाल।
• उत्त‍म आवास और उसके निर्माण में प्रयुक्तस सामग्री, निर्माण सामग्री की गणनाकरना।
• शौचालय की स्वमच्छसता, परिवेश की साफ-सफाई और अच्छीा आदतें।

4. हमारा भोजन और आदतें-
• भोजन की आवश्यनकता, भोजन के घटक।
• फल एवं सब्जियों का महत्वस, पौधों के अंगों के अनुसार फल, सब्जियाँ।
• भोज्यं पदार्थों का स्वारस्य्े वर्धक संयोजन।
• विभिन्नस प्रकार की आयु का भोजन और उनको ग्रहण करने का सही समय।
• उत्त म स्वाथस्य् क हेतु भोजन की स्वाच्छ,ता और सुरक्षा के उपाय।
• खाद्य संसाधनों की सुरक्षा।

5. पानी और हवा प्रदूषण एवं संक्रमण-
• जीवन के लिए स्व च्छस पानी और स्व च्छक हवा की आवश्याकता।
• स्था नीय मौसम, जल चक्र और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और जलवायु परिवर्तन में हमारी भूमिका।
• पानी के स्रोत, उसके सुरक्षित रखरखाव और संरक्षण एवं पोषण के तरीके।
• संक्रमित वायु एवं पानी से होने वाले रोग, उनका उपचार और बचाव, अन्यस संक्रामक रोग।
• हवा, पानी, भूमि का प्रदूषण और उससे सुरक्षा, विभिन्ना अपशिष्ट पदार्थों और उनका प्रबंध, उचित निस्तािरण।
• भूकंप, बाढ़, सूखा आदि आपदाओं से सुरक्षा और बचाव के उपाय, आपदा प्रबंधन।
• प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन – संसाधनों का उचितदोहन, डीजल, पेट्रोलियम खपत एवं संपोषण आदि।

6. प्राकृतिक वस्तुिएं और उपज-
• मिट्टी, पानी, बीज और फसल का संबंध, जैविक-रासायनिक खाद।
• विभिन्ना फसलें उनके उत्पाजदक क्षेत्र।
• फसल उत्पाृदन के लिए आवश्याक कृषि कार्य और उपकरण।

7. मानव निर्मित साधन एवं उसके क्रियाकलापों का प्रभाव-
• वनों की कटाई और शहरीकरण, पारिस्थितिक संतुलन पर प्रभाव
• ओजोन क्षय, अम्ली य वर्षा, ग्लोरबल वार्मिग, ग्रीन हाउस प्रभाव आदि के वैज्ञानिक कारणएवं निदान
• पालिथिन प्लांस्टिक का उपयोग और उनकाअपघटक अपमार्जक
• जीवाश्म ईंधन के प्रयोग के प्रभाव
• आपदा प्रबंधन

8. अंतरिक्ष विज्ञान-
• अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का परिचय, उनके अंतरिक्ष में जीवन बिताने के अनुभव।
• अंतरिक्ष जीवन के वैज्ञानिक तथ्यग, जीवन की संभावनाएं। अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष खोंजें एवं भविष्यावाणियां।

(ब) पेडागॉजिकल मुद्दे – 10 प्रश्न, इन भागों से संबंधित-
• पर्यावरण अध्येयन की अवधारणा और उसकी आवश्यरकता।
• पर्यावरण अध्येयन का महत्वण, समेकित पर्यावरणीय शिक्षा।
• पर्यावरणीय शिक्षा के सूत्र एवं दायित्वउ।
• पर्यावरणीय शिक्षा का विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से सहसंबंध।
• अवधारणाओं के स्पाष्टीऔकरण हेतु प्रवि‍धियां और गतिविधियां।
• परिवेशीय भ्रमण, प्रयोगात्मकक कार्य, प्रोजेक्टग कार्य और उनका महत्वस।
• चर्चा, परिचर्चा, प्रस्तुेतीकरण और समूह शिक्षण व्यतवस्थाय से सीखना।
• सतत-व्यापपक मूल्यां कन – शिक्षण के दौरान प्रश्नस पूछना, मुखर और लिखित अभिव्य-क्ति के अवसर देना, वर्कशीट्स एवं एनेक्डॉ टल रिकार्डका प्रयोग, बच्चे की पोर्टफोलियो का विकास करना, केस स्टलडी और व्ययक्तिगत प्रोफाइल से शिक्षण व्यटवस्थािएं।
• पर्यावरणीय शिक्षा में शिक्षण सामग्री/ सहायक सामग्री और उसका अनुप्रयोग।
• स्थागनीय परिवेश की पर्यावरणीय समस्यावएं और उनके समाधान खोजने की क्षमता का विकास।